Vikram sarabhai in hindi. Biography of Vikram Sarabhai in Hindi 2019-01-07

Vikram sarabhai in hindi Rating: 6,5/10 1219 reviews

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vikram sarabhai in hindi

Vikram Sarabhai with his group of students started constructing and setting up a huge number of cosmic ray telescopes for an undisturbed continuous observation of changing trends in the cosmic radiation and the intensity of the ray using the Geiger Muller counter telescopes in different places like Kodaikanal, Gulmarg and Trivendrum apart from Ahmedabad. As a result of Dr. After a remarkable effort in setting up the infrastructure, personnel, communication links, and launch pads, the inaugural flight was launched on November 21, 1963 with a sodium vapour payload. He was also Chairman of the Atomic Energy Commission. Mallika has won many accolades during her long career, the Golden Star Award is one of them, which she won for the Best Dance Soloist, Theatre De Champs Elysees, Paris 1977. होमी जहांगीर भाभा की एक विमान दुर्घटना में असामयिक मृत्यु के बाद डॉ.

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Vikram Sarabhai : Birth

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साराभाई Vikram Sarabhai 30 दिसम्बर 1971 को पंचतत्व में विलीन हो गये डा. Vikram Sarabhai Family of India who were the leading Industrialists and actively participated in Indian Independence Movement. But all was not well between then prime minister Indira Gandhi and the Atomic Energy Commission, a body under the Department of Atomic Energy, chairperson Vikram Sarabhai. Mallika played the role of in the 's play. Vikram Sarabhai died on 31st December 1971 of a heart attack due to heavy stress. Proin dui metus, fringilla id condimentum eu, rutrum in erat. Nulla eget libero ligula, ac scelerisque sapien.

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विक्रम साराभाई जी की जीवनी

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Sarabhai in setting up the first rocket launching station in India. Here is Follows — He who can listen to the music in the midst of noise can achieve great things. Jha had become governor of the Reserve Bank; his successor P. He was also Chairman of the Atomic Energy Commission. Homi Jehangir Bhabha, widely regarded as the father of India's nuclear science program, supported Dr. अपने उपक्रम में साराभाई ने डॉ.

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Vikram Sarabhai, torn apart by the loss of Indira Gandhi's trust

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Sarabhai started a project for the fabrication and launch of an Indian satellite. He made a great contribution towards the society as he wants science to benefit the human being. Mridulaben was also like that. She manages the located at Ahmedabad, a centre for the arts and for the use of arts as a language for behaviour change. After that he moved to England and joined the St. रमण के निरीक्षण में कॉसमिक रेज़ पर अनुसंधान करने लगे। उन्होंने अपना पहला अनुसंधान लेख न्न टाइम डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ कास्मिक रेज़ न्न भारतीय विज्ञान अकादमी की कार्यविवरणिका में प्रकाशित किया। वर्ष 1940-45 की अवधि के दौरान कॉस्मिक रेज़ पर साराभाई के अनुसंधान कार्य में बंगलौर और कश्मीर-हिमालय में उच्च स्तरीय केन्द्र के गेइजर-मूलर गणकों पर कॉस्मिक रेज़ के समय-रूपांतरणों का अध्ययन शामिल था। द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति पर वे कॉस्मिक रे भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में अपनी डाक्ट्रेट पूरी करने के लिए कैम्ब्रिज लौट गए। 1947 में उष्णकटीबंधीय अक्षांक्ष ट्रॉपीकल लैटीच्यूड्स में कॉस्मिक रे पर अपने शोधग्रंथ के लिए कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में उन्हें डाक्ट्ररेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। इसके बाद वे भारत लौट आए और यहां आ कर उन्होंने कॉस्मिक रे भौतिक विज्ञान पर अपना अनुसंधान कार्य जारी रखा। भारत में उन्होंने अंतर-भूमंडलीय अंतरिक्ष, सौर-भूमध्यरेखीय संबंध और भू-चुम्बकत्व पर अध्ययन किया। डॉ॰ साराभाई एक स्वप्नद्रष्टा थे और उनमें कठोर परिश्रम की असाधारण क्षमता थी। फ्रांसीसी भौतिक वैज्ञानिक पीएरे क्यूरी 1859-1906 जिन्होंने अपनी पत्नी मैरी क्यूरी 1867-1934 के साथ मिलकर पोलोनियम और रेडियम का आविष्कार किया था, के अनुसार डॉ॰ साराभाई का उद्देश्य जीवन को स्वप्न बनाना और उस स्वप्न को वास्तविक रूप देना था। इसके अलावा डॉ॰ साराभाई ने अन्य अनेक लोगों को स्वप्न देखना और उस स्वप्न को वास्तविक बनाने के लिए काम करना सिखाया। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की सफलता इसका प्रमाण है। डॉ॰ साराभाई में एक प्रवर्तक वैज्ञानिक, भविष्य द्रष्टा, औद्योगिक प्रबंधक और देश के आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक उत्थान के लिए संस्थाओं के परिकाल्पनिक निर्माता का अद्भुत संयोजन था। उनमें अर्थशास्त्र और प्रबंध कौशल की अद्वितीय सूझ थी। उन्होंने किसी समस्या को कभी कम कर के नहीं आंका। उनका अधिक समय उनकी अनुसंधान गतिविधियों में गुजरा और उन्होंने अपनी असामयिक मृत्युपर्यन्त अनुसंधान का निरीक्षण करना जारी रखा। उनके निरीक्षण में 19 लोगों ने अपनी डाक्ट्रेट का कार्य सम्पन्न किया। डॉ॰ साराभाई ने स्वतंत्र रूप से और अपने सहयोगियों के साथ मिलकर राष्ट्रीय पत्रिकाओं में 86 अनुसंधान लेख लिखे। कोई भी व्यक्ति बिना किसी डर या हीन भावना के डॉ॰ साराभाई से मिल सकता था, फिर चाहे संगठन में उसका कोई भी पद क्यों न रहा हो। साराभाई उसे सदा बैठने के लिए कहते। वह बराबरी के स्तर पर उनसे बातचीत कर सकता था। वे व्यक्तिविशेष को सम्मान देने में विश्वास करते थे और इस मर्यादा को उन्होंने सदा बनाये रखने का प्रयास किया। वे सदा चीजों को बेहतर और कुशल तरीके से करने के बारे में सोचते रहते थे। उन्होंने जो भी किया उसे सृजनात्मक रूप में किया। युवाओं के प्रति उनकी उद्विग्नता देखते ही बनती थी। डॉ॰ साराभाई को युवा वर्ग की क्षमताओं में अत्यधिक विश्वास था। यही कारण था कि वे उन्हें अवसर और स्वतंत्रता प्रदान करने के लिए सदा तैयार रहते थे। डॉ॰ साराभाई एक महान संस्थान निर्माता थे। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में संस्थान स्थापित करने में अपना सहयोग दिया। साराभाई ने सबसे पहले अहमदाबाद वस्त्र उद्योग की अनुसंधान एसोसिएशन एटीआईआरए के गठन में अपना सहयोग प्रदान किया। यह कार्य उन्होंने कैम्ब्रिज से कॉस्मिक रे भौतिकी में डाक्ट्रेट की उपाधि प्राप्त कर लौटने के तत्काल बाद हाथ में लिया। उन्होंने वस्त्र प्रौद्योगिकी में कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया था। एटीआईआरए का गठन भारत में वस्त्र उद्योग के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। उस समय कपड़े की अधिकांश मिलों में गुणवत्ता नियंत्रण की कोई तकनीक नहीं थी। डॉ॰ साराभाई ने विभिन्न समूहों और विभिन्न प्रक्रियाओं के बीच परस्पर विचार-विमर्श के अवसर उपलब्ध कराए। डॉ॰ साराभाई द्वारा स्थापित कुछ सर्वाधिक जानी-मानी संस्थाओं के नाम इस प्रकार हैं- भौतिकी अनुसंधान प्रयोगशाला पीआरएल , अहमदाबाद; भारतीय प्रबंधन संस्थान आईआईएम अहमदाबाद; सामुदायिक विज्ञान केन्द्र; अहमदाबाद, दर्पण अकादमी फॉर परफार्मिंग आट्र्स, अहमदाबाद; विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्द्र, तिरूवनंतपुरम; स्पेस एप्लीकेशन्स सेंटर, अहमदाबाद; फास्टर ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर एफबीटीआर कलपक्कम; वैरीएबल एनर्जी साईक्लोट्रोन प्रोजक्ट, कोलकाता; भारतीय इलेक्ट्रानिक निगम लिमिटेड ईसीआईएल हैदराबाद और भारतीय यूरेनियम निगम लिमिटेड यूसीआईएल जादुगुडा, बिहार। विक्रम साराभाई भारतीय डाकटिकट पर 1972 डॉ॰ होमी जे. This center was established at Thumba near Thiruvananthapuram on the coast of the Arabian Sea, primarily because of its proximity to the equator.

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Vikram Sarabhai Biography

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Raman at the Indian Institute of Science, Bangalore His interest in solar physics and cosmic ray led him to set up many observation stations around the country. To us, there is no ambiguity of purpose. He successfully convinced the government of the importance of a space programme for a developing country like India after the Russian Sputnik launch. At the professional level it was evident in the consonance between their public utterances on certain issues. As a result, the first Indian satellite, Aryabhata, was put in orbit in 1975 from a Russian Cosmodrome. Awards and Achievements Image Source : Google There are various Awards and Achievements of Dr. साराभाई को परमाणु ऊर्जा आयोग का अध्यक्ष बनाया गया इसके अतिरिक्त उन्होंने योजना आयोग, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सदस्य के रूप में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया 1968 ई.

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विक्रम साराभाई जी की जीवनी

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विक्रम साराभाई Vikram Sarabhai का जन्म 12 अगस्त 1919 को गुजरात में हुआ था उनके पिता अम्बालाल साराभाई एक प्रसिद्ध व्यवसायी थे अपनी प्रारम्भिक शिक्षा घर पर प्राप्त करने के साथ ही उन्होंने बागवानी ,तकनीकी ,भाषा ,विज्ञान , नृत्य ,संगीत ,चित्रकला फोटोग्राफी आदि की शिक्षा भी विशिष्ट रूप से प्राप्त की डा. He was only 28 at that time. After a remarkable effort in setting up the infrastructure, personnel, communication links, and launch pads, the inaugural flight was launched on November 21, 1963 with a sodium vapour payload. Privately, however, Vikram appears to have been torn apart. Quotes By Vikram Sarabhai Image Source : Google These are Various Quotes which are saying By Dr. Vikram Sarabhai started a project for the fabrication and launch of an Indian Satellite.

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Welcome to VIKRAM SARABHAI SPACE CENTRE

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Attractive benefits like medical facilities for employees and their dependents, subsidised canteen facilities, and free transport are added attractions. Maecenas massa metus, ultrices vitae convallis ut, cursus eu orci. Gujarat Ne Asmita 5th ed. But the machinations and power play had changed her and made her increasingly suspicious and intolerant of others. Vikram Sarabhai married the classical dancer in 1942. Ministry of Home Affairs, Government of India.

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VIKRAM SARABHAI wslive.com,Mavelikara

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Amongst them is An Idea Named Meera; In Search of the Goddess and SvaKranti: The Revolution Within. In May 1971, he took a rare holiday with his family in Manali. Sarabhai matriculated from the Gujarat College in Ahmedabad after passing the Intermediate Science examination. His father Ambalal Sarabhai was an affluent industrialist and owned many mills in Gujarat. Video uploaded under permission from Seagull Publishers Pvt Ltd, copyright with www.

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Vikram Sarabhai, torn apart by the loss of Indira Gandhi's trust

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ए की परीक्षा उत्तीर्ण की। द्वितीय विश्वयुद्ध के प्रारंभ मे वे भारत लौट आए। यहां एक ओर उनका संपर्क सर सी. What, therefore, is a government at its best? He received the Tripos in Natural Sciences from Cambridge in 1940. After a remarkable effort in setting up the infrastructure, personnel, communication links, and launch pads, the inaugural flight was launched on November 21, 1963 with a sodium vapour payload. Integer nec risus neque, eget sagittis est. The movie which had as the hero, did not do very well at the box office.

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Vikram Sarabhai

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Physical Research Laboratory, Department of Space, Government of India. The couple had two children. Vikram Sarabhai died on 30 December 1971 at Kovalam, Thiruvananthapuram, Kerala. Today, the Centre is called the Vikram A Sarabhai Community Science Centre Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Birth Vikram Ambalal Sarabhai was born on August 12, 1919 at Ahmedabad in an affluent family of progressive industrialists. The evolution of scientist The kind of interest that Vikram Sarabhai has shown in science and his implementation of research works in time variation mechanism in cosmic rays required a lot of instrumentation to observe the changing trends. The Sarabhai family was an important and rich Jain business family.

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